ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के शरशैया पर लेटे भीष्म पितामह के मुख से निकली धर्म की अमृतमयी वर्षा आज भी हृदय को शीतल कर देती है।
अनुशासनपर्व · अध्याय 151
सदाचार का सार