ग्रंथसार
क्या क्रोध की अग्नि में जलना ही पुरुषार्थ है, या क्षमा की शीतलता में जीवन का वास्तविक सार छिपा है?
अनुशासनपर्व · अध्याय 17
क्षमा का उत्कृष्ट स्वरूप