ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की रणभेरी शांत होने के बाद, जो ज्ञान का अमृत शेष बचा, उसी की धारा आज भी हमारे जीवन को अभिसिंचित कर रही है।
अनुशासनपर्व · अध्याय 2
धर्म का स्वरूप