ग्रंथसार
मौन केवल शब्दों का अभाव नहीं, अपितु अंतर्मन की वह ऊर्जा है जो मनुष्य को साधारण से असाधारण बना देती है।
अनुशासनपर्व · अध्याय 26
मौन का महत्त्व