ग्रंथसार
दान केवल धन का आदान-प्रदान नहीं, अपितु आत्मा के संस्कार का एक अत्यंत पावन मार्ग है।
अनुशासनपर्व · अध्याय 35
विद्वानों को दान का महत्त्व