ग्रंथसार
सदाचार की सुगन्ध से ही मनुष्य का व्यक्तित्व महकता है, जैसे पुष्प अपनी सुगंध से वन को सुरभित कर देता है।
अनुशासनपर्व · अध्याय 4
सदाचार और उत्तम आचरण