ग्रंथसार
गुरुदेव सूतजी के मुख से दीपदान का वह अलौकिक रहस्य सुनकर आश्रम का वातावरण ज्ञान की ज्योति से प्रज्वलित हो उठा।
अनुशासनपर्व · अध्याय 41
दीपदान का माहात्म्य