ग्रंथसार
क्या आपने कभी सोचा है कि परोपकार के अनगिनत मार्गों में से अन्नदान को ही सर्वोपरि क्यों माना गया है?
अनुशासनपर्व · अध्याय 5
अन्नदान का महत्त्व