ग्रंथसार
अन्न के एक-एक दाने में छिपे पुण्य और परोपकार की महिमा को जानकर ही मनुष्य का हृदय तृप्त होता है।
अनुशासनपर्व · अध्याय 50
अन्न दान का माहात्म्य