ग्रंथसार
क्या क्रोध की ज्वाला में जलना ही पुरुषार्थ है, या क्षमा की शीतल छाया में स्वयं को जीत लेना ही असली बल है?
अनुशासनपर्व · अध्याय 6
क्षमा का बल