ग्रंथसार
क्या आप जानते हैं कि थके हुए पथिक को सुखद निद्रा प्रदान करना मात्र दान नहीं, अपितु स्वयं के दुखों का निवारण है?
अनुशासनपर्व · अध्याय 62
शय्या दान का माहात्म्य