ग्रंथसार
आश्रम की शीतल छाया में बैठे सूतजी ने जब देवरात को पादुका दान का गूढ़ रहस्य समझाया, तो मानो जीवन के कठिन पथ का अर्थ ही बदल गया।
अनुशासनपर्व · अध्याय 88
पादुका दान का माहात्म्य