ग्रंथसार
मृत्यु के पश्चात शोक का अर्थ केवल विछोह नहीं, अपितु जीवन की नश्वरता को स्वीकार कर कर्तव्य पथ पर अडिग होने की साधना है।
आश्रमवासिकपर्व · अध्याय 20
अंतिम संस्कार और शोक