ग्रंथसार
मृत्यु के शीतल आलिंगन के बाद जब शोक की अग्नि मन को दग्ध करने लगती है, तब विवेक का दीपक ही एकमात्र प्रकाश बनकर शेष रहता है।
आश्रमवासिकपर्व · अध्याय 21
नारद द्वारा युधिष्ठिर को सांत्वना