ग्रंथसार
गंगा के शीतल तट से हस्तिनापुर के राजदरबार तक, समय की धारा कैसे दुखों को बहाकर नए युग का सृजन करती है, आइए आज सूतजी से यह कथा सुनें।
आश्रमवासिकपर्व · अध्याय 24
सामान्य जीवन का पुनः प्रारंभ