ग्रंथसार
आश्रम की शांत वादियों में बैठे सूतजी और उनके प्रिय शिष्य देवरात के संवाद से आज हम हस्तिनापुर के उन तपस्वियों की गाथा जानेंगे, जिन्होंने सांसारिक मोह को त्यागकर परमात्मा की शरण ली थी।
आश्रमवासिकपर्व · अध्याय 28
तपस्या का शुभारंभ