ग्रंथसार
गुरुदेव सूतजी के मुख से वनवासी धृतराष्ट्र और नारद मुनि की अंतिम भेंट का वृत्तांत सुनकर शिष्य देवरात के नेत्र सजल हो गए।
आश्रमवासिकपर्व · अध्याय 30
देवर्षि नारद की भविष्यवाणी