ग्रंथसार
मृत्यु कोई अंत नहीं, अपितु भौतिक बंधनों से मुक्त होकर एक नई चेतना में प्रवेश करने का द्वार है।
आश्रमवासिकपर्व · अध्याय 36
देह-त्याग और स्वर्गारोहण