ग्रंथसार
जीवन के अंतिम सत्य को जानने की जिज्ञासा ने आज आश्रम के वातावरण को और भी गंभीर बना दिया है।
आश्रमवासिकपर्व · अध्याय 37
संजय का हस्तिनापुर आगमन