ग्रंथसार
क्या शोक के घने अंधकार से निकलकर धर्मराज युधिष्ठिर ने पुनः अपने राजधर्म को एक नए प्रकाश में देखा?
आश्रमवासिकपर्व · अध्याय 43
पुनः कर्तव्य पालन