ग्रंथसार
समय की धारा के साथ जब राजमुकुट का मोह छूटने लगे, तब वही मनुष्य वास्तविक मोक्ष की यात्रा पर चल पड़ता है।
आश्रमवासिकपर्व · अध्याय 44
समय का चक्र