ग्रंथसार
जीवन के अंतिम पड़ाव पर मोह के बंधन को तोड़कर सत्य की खोज में निकल पड़ना ही वानप्रस्थ का वास्तविक सार है।
आश्रमवासिकपर्व · अध्याय 45
वन-प्रस्थान