ग्रंथसार
सूतजी की अमृतमयी वाणी से आज दक्षिण भारत की उस ऐतिहासिक विजयगाथा का रहस्य सुलझ रहा है, जहाँ शस्त्रों की खनक मैत्री के मीठे संगीत में बदल गई थी।
आश्वमेधिकपर्व · अध्याय 18
द्रविड़ राजाओं से सामना