ग्रंथसार
नर्मदा के तट पर जब संध्या की वेला ने अपने स्वर्णिम रंग बिखेरे, तब सूतजी ने अर्जुन की उस अनुपम यात्रा का वृत्तांत सुनाना आरंभ किया, जहाँ शस्त्रों से नहीं, अपितु प्रेम से विजय प्राप्त हुई थी।
आश्वमेधिकपर्व · अध्याय 19
पश्चिमी समुद्र तट की यात्रा