ग्रंथसार
नर्मदा के तट पर जब संध्या की लाली फैली, तब देवरात ने सूतजी के चरणों में बैठकर पूछा कि जब साक्षात् नारायण ही हस्तिनापुर से विदा हुए, तो वह दृश्य कितना भावुक रहा होगा?
आश्वमेधिकपर्व · अध्याय 37
कृष्ण की द्वारका यात्रा