ग्रंथसार
नैनिमिषारण्य की पावन भूमि पर आज सूतजी महाराज ने एक ऐसा प्रसंग छेड़ा, जिसने देवरात के मन में व्याप्त ईश्वरीय न्याय के प्रति सभी संदेहों का निवारण कर दिया।
आश्वमेधिकपर्व · अध्याय 38
उत्थंक मुनि का वृत्तांत