ग्रंथसार
धर्म के मार्ग पर चलने वाले वीर की पदचाप मात्र से ही धरती कैसे पवित्र हो जाती है, आइए आज सूतजी के मुख से अर्जुन की दिग्विजय की कथा सुनें।
आश्वमेधिकपर्व · अध्याय 43
अर्जुन की दिग्विजय