ग्रंथसार
दान का वास्तविक मूल्य स्वर्ण की चमक में नहीं, बल्कि देने वाले के हृदय की निश्छलता में छिपा होता है, आइए आज एक ऐसी ही अद्भुत कथा का श्रवण करें।
आश्वमेधिकपर्व · अध्याय 47
नेवले का आगमन