ग्रंथसार
अश्वमेध यज्ञ की पावन पूर्णाहुति के पश्चात धर्मराज युधिष्ठिर के अंतर्मन में उपजे उस दिव्य परिवर्तन की कथा आज हम सुनेंगे।
आश्वमेधिकपर्व · अध्याय 48
अश्वमेध की पूर्णता