ग्रंथसार
नयमिषारण्य की पावन भूमि पर आज सूतजी के मुख से अनुगीता के उस अंतिम संवाद की कथा गुंजायमान है, जिसने अर्जुन के भीतर के अंधकार को सदा के लिए मिटा दिया।
आश्वमेधिकपर्व · अध्याय 52
अर्जुन का ज्ञान-लाभ