ग्रंथसार
नयी चेतना के उदय की यह कथा, गुरु की वाणी से अर्जुन के हृदय में उतरी ज्ञान की वह गंगा है जो आज भी हम सबके मन को पावन करने की सामर्थ्य रखती है।
आश्वमेधिकपर्व · अध्याय 53
ब्राह्मण के उपदेश