ग्रंथसार
आश्रम की शांत संध्या में जब दीप प्रज्वलित हुए, तो सूतजी ने धर्म और संकल्प की उस महागाथा का द्वार खोल दिया।
आश्वमेधिकपर्व · अध्याय 60
यज्ञ का शुभारंभ और संकल्प