ग्रंथसार
आश्रम की शांत संध्या में जब दीप प्रज्वलित हुआ, तो देवरात के मन में उठा वह प्रश्न, जो युगों-युगों से जिज्ञासुओं को व्याकुल करता रहा है कि जब साक्षात ईश्वर का साथ छूटता है, तो भक्त अपना धैर्य कैसे संभालते हैं?
आश्वमेधिकपर्व · अध्याय 63
भगवान श्रीकृष्ण का प्रस्थान