ग्रंथसार
क्या शुभ और अशुभ के द्वंद्व से पार पाना वास्तव में संभव है, या हम सदा कर्मों की बेड़ियों में जकड़े रहेंगे?
आश्वमेधिकपर्व · अध्याय 70
शुभ और अशुभ का स्वरूप