ग्रंथसार
नमीशारण्य की पावन भूमि पर सूतजी के मुख से धर्मराज युधिष्ठिर के न्याय-शासन की कथा सुनकर शिष्य देवरात का हृदय श्रद्धा से भर गया।
आश्वमेधिकपर्व · अध्याय 80
युधिष्ठिर का धर्म-राज्य