ग्रंथसार
गुरुदेव, जब भक्त की निष्ठा डगमगाने लगती है, तब क्या स्वयं परमपिता उसे मार्ग दिखाने के लिए धरा पर उतर आते हैं?
आश्वमेधिकपर्व · अध्याय 81
उत्थंक का द्वारका आगमन