ग्रंथसार
क्या ईश्वर के हाथ में होने के बाद भी संसार में इतना महाविनाश होना अनिवार्य था? आइए, सूतजी और उनके शिष्य देवरात के संवाद से इस गूढ़ रहस्य को समझते हैं।
आश्वमेधिकपर्व · अध्याय 82
उत्थंक का क्रोध और उपदेश