ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की धूल शांत होते ही सूतजी ने देवरात को पितामह भीष्म के उस अंतिम सूर्यास्त की गाथा सुनाई, जिसने नियति की दिशा ही बदल दी थी।
भीष्मपर्व · अध्याय 100
ढलते सूर्य का शोक