ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की रणभूमि केवल रक्तपात का स्थान नहीं, अपितु मानवीय संकल्प और धर्म की पराकाष्ठा का जीवंत साक्ष्य है।
भीष्मपर्व · अध्याय 104
पांडवों का अडिग संकल्प