ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के उस भीषण रण में भगवान श्रीकृष्ण का सारथी रूप केवल अश्वों को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि नियति के चक्र को घुमाना था।
भीष्मपर्व · अध्याय 111
श्रीकृष्ण की कूटनीति और मार्गदर्शन