ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की रणभूमि पर बिछी उस शर-शय्या का दृश्य आज भी धर्म-अधर्म के संघर्ष की सबसे मर्मस्पर्शी गाथा है, जिसे सुनकर हृदय कांप उठता है।
भीष्मपर्व · अध्याय 117
शर-शय्या पर पितामह