ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की रणभूमि में जब सूर्य की पहली किरण के साथ ही शंखनाद हुआ, तो वह केवल युद्ध का आरंभ नहीं, अपितु नियति का उद्घोष था।
भीष्मपर्व · अध्याय 13
द्वितीय दिवस का भीषण युद्ध