ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के उस चौथे दिन की रक्त-रंजित गाथा को सुनकर आज भी मन में धर्म और अधर्म के संघर्ष की गूँज सुनाई देती है।
भीष्मपर्व · अध्याय 17
चतुर्थ दिवस का भीषण संहार