ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के रणक्षेत्र में जब छठे दिन का सूर्य अस्त हुआ, तो वह अपने साथ केवल शवों का अंबार ही नहीं, अपितु मानवता के अंतर्मन को झकझोर देने वाली विभीषिका भी लेकर आया था।
भीष्मपर्व · अध्याय 19
षष्ठ दिवस: भारी क्षति और विलाप