ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के उस भीषण रण में अर्जुन के गांडीव की टंकार से न केवल दिशाएँ गूंज उठीं, बल्कि धर्म के मार्ग पर आए संकट का भी अंत हुआ।
भीष्मपर्व · अध्याय 28
संसप्तकों का वध और अर्जुन का संकल्प