ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की रणभूमि में जब शंखों का नाद गूँजा, तब नियति ने भी अपना मुख खोल लिया था।
भीष्मपर्व · अध्याय 3
सेनाओं का व्यूह-रचना