ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की धूल में लिपटी वह चौथी संध्या, जब पितामह भीष्म की गर्जना से दिशाएं कांप उठीं।
भीष्मपर्व · अध्याय 54
पितामह का रण-कौशल