ग्रंथसार
वीरता के उस महासमर में जब न्याय की मर्यादाएं तार-तार हो गईं, तब एक बालक ने अपने प्राणों की आहुति देकर युग की दिशा बदल दी।
भीष्मपर्व · अध्याय 58
अभिमन्यु का बलिदान