ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की रणभूमि में जब मर्यादाएं छिन्न-भिन्न हो गईं, तब काल के उस नग्न तांडव ने मानवता को एक गहरे प्रश्न के सामने खड़ा कर दिया।
भीष्मपर्व · अध्याय 62
अराजकता का प्रादुर्भाव