ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के रक्त रंजित रणक्षेत्र में जब विजय का दंभ धराशायी हुआ, तब दुर्योधन के हृदय में उठा वह ज्वार आज भी मानवता को चेतावनी देता है।
भीष्मपर्व · अध्याय 67
दुर्योधन का शोक और विलाप